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Friday, 15 August 2014

क्यों नरेंद्र मोदी का स्वतंत्रता दिवस भाषण ऐतिहासिक था ??

भाषण  हमारे देश की पूरनी परंपरा रही है हम कितना भी अच्छा भाषण सुनले  हम तालियाँ बड़ी ज़ोरों से बजाते है पर हम उन काही हुई बातों  पर कितना अमल करते है  ये आप भी जानते है और हम भी ! कुछ लोग  तो पूछते रहते है अच्छे दिन कब आएँगे ? पर मुझे एक बात समझ नहीं आती  जब तक हम भाषण मे कहीं गयी बातों पर ध्यान नहीं देंगे तो  हम अच्छे दिन आने का सिर्फ इंतजार ही करते रह जाएंगे  आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आज का भाषण बहुत महत्वपूर्ण है उन्होने कुछ  बातों पर  ध्यान देने की बात  तो कहीं है और अगर इनपर ही अमल किया जाये तो  क्या हम खुद अच्छे दिन नहीं ला  सकते ताकि हम पूरी दुनिया में कहीं भी गर्व से कह सके की We are proud to be an Indian :) 

देश के 68वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योजना आयोग को समाप्त करने का ऐलान किया और विपक्ष को साथ लेकर चलने के आह्वान के साथ ही जातिगत एवं सांप्रदायिक हिंसा पर रोक की हिमायत की साथ ही बेटियों की सुरक्षा और गरीबी से लड़ने का मुद्दा भी उठाया।
सत्ता में आने के तीन माह से भी कम समय के भीतर मोदी ने विकास और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नये विचारों की इबारत लिखते हुए कहा कि भारत को वैश्विक निर्माण का आधार बनना चाहिए।
मोदी आज सबसे पहले राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पीएम लाल किला पहुंचे और सेना ने उन्हें सलामी दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्‍वतंत्रता दिवस पर लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ा। वह ऐसा करने वाले पहले प्रधानमंत्री बन गए। उन्‍होंने निर्देश दिया था कि भाषण देते वक्‍त उनके ऊपर छाता तान कर नहीं रखा जाए। साथ ही, उनके लिए बनाए गए मंच पर बुलेट प्रूफ घेरा भी नहीं था।
मोदी ने योजना आयोग खत्म करने का ऐलान किया। मोदी ने कहा कि योजना आयोग में ढांचागत परिवर्तन कर नए संस्थान का गठन किया जाएगा। जल्दी ही नए संस्था का ब्लूप्रिंट जारी किया जाएगा।
नरेंद्र मोदी ने देश के 68वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 'अत्यधिक गरीब' लोगों के लिए बैंक खाता खोलने और उनके लिए 1,00,000 रुपये के बीमा योजना की घोषणा की। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना' के माध्यम से हम गरीब से गरीब लोगों के लिए बैंक खाता खुलवाना चाहते हैं। "जन धन योजना' के तहत गरीब लोगों का एक लाख रुपये का बीमा कराया जाएगा।
नरेंद्र मोदी ने विश्वभर के निवेशकों से अपील की कि वे भारत विनिर्माण का केंद्र बनाएं। उन्होंने कहा, "कम, मेक इन इंडिया" । "मैं विश्वभर से कहता हूं, भारत में सामान का उत्पादन करें। सामान कहीं भी बेचें, लेकिन इसका उत्पादन भारत में करें। हमारे पास कौशल और योग्यता है। हमारा सपना होना चाहिए कि हम विश्वभर में कह सकें, 'मेड इन इंडिया'।"
नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक साल के अंदर हर विद्यालय में लड़कियों के लिए अलग शौचालयों का निर्माण हो जाना चाहिए। एक साल के भीतर प्रत्येक विद्यालय में बालिकाओं के लिए अलग शौचालय का निर्माण हो जाना चाहिए,
देश के कुछ भागों में हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिकता और जातिवाद देश की प्रगति में बाधा है। मोदी ने कहा कि हम सदियों से सांप्रदायिक तनाव से गुजर रहे हैं। इसकी वजह से देश विभाजन तक पहुंच गया़, जातिवाद सांप्रदायवाद का जहर कब तक चलेगा किसका भला होगा बहुत लोगों को मार दिया, काट दिया, कुछ नहीं पाया, भारत मां के दामन पर दाग लगाने के अलावा कुछ नहीं पाया।
बलात्कार की घटनाओं पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा माथा शर्म से झुक जाता है, जब हम इस तरह की घटनाओं के बारे में सुनते हैं। उन्होंने उन राजनेताओं पर प्रहार किया जो इस तरह के अपराध का विश्लेषण करने के लिए मनोवैज्ञानिक बन जाते हैं।
नरेंद्र मोदीने भारत के निराशाजनक लिंगानुपात की ओर भी ध्यान खींचा। "मैं डॉक्टरों से अपील करता हूं कि गर्भस्थ कन्या की हत्या न करें। मैं माता-पिता से बेटी की हत्या न करने की अपील करता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ऐसे परिवारों को भी जानते हैं, जिनमें पांच बेटे थे और जो बड़े मकानों में रहते थे, लेकिन अपने बूढ़े मां-बाप को वृद्धाश्रम भेज दिया। वहीं, मैंने ऐसे परिवार भी देखे हैं, जिनमें इकलौती बेटी ने अपने माता-पिता की देखभाल करने के लिए शादी भी नहीं की।"

Thursday, 10 April 2014

स्टंटवादी पार्टी !


अगर आपको याद हो तो जया बच्चन जी  17 दिसम्बर 2012 को निरभया पर हुए बलात्कार पर संसद मे   रो पड़ी थी  ये समाजवादी पार्टी की सांसद है अगर उनके वह आँसू असली थे तो आज ही इस  पार्टी को छोड़ दे |


  समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह ने चुनावी मौसम में बलात्कार पर अजीब बयान देकर विवाद पैदा कर दिया है। मुरादाबाद की रैली में आज मुलायम ने रेप पर फांसी की सजा का विरोध किया। मुलायम ने कहा कि क्या रेप करने की सजा फांसी होगी?
मुलायम ने कहा कि "लड़कों से गलती हो जाती है। मेरी सरकार आएगी तो ऐसे कानून को बदलेगी। मुलायम सिंह यादव ने वादा किया कि वह सत्ता में आए तो ऐसा कानून हटाएंगे जो बलात्कारियों को फांसी की सजा देता है। उन्होंने कहा कि रेप में फांसी की सजा सही नहीं है। हम ऐसा कानून बनाएंगे जो बलात्कारियों को भी सजा दे और झूठी शिकायत करने वालों को भी।"


 ये पार्टी वाले दिमाग से पैदल तो नहीं हो गए है?  कल आज़म खान ने भारतीय सेना को बाटने का काम किया था आज ये "महान" (कहना उचित नहीं होगा )  नेता फिजूल का बयान देकर चुनाव जीतना चाहता हैं !  अरे ऐसा व्यक्ति  प्रधानमंत्री अगर बन गया  तो देश मे हर रोज़ बलात्कार , हत्या , छेड़-छाड़ जैसी वारदाते होती रहेंगी समाजवादी पार्टी मुझे नहीं लगता कहीं से भी समाज के हित मे काम करती नज़र आती है ! मुजजफ्फर  नगर दंगो मे आज भी पीड़ित परेशान है उनकी तरफ किसी की नज़र नहीं जाती वोट बैंक की राजनीति के लिए कितना अपना स्तर गिराओगे ? सुधार जाओ नहीं तो जनता माफ नहीं करेगी !  

Sunday, 23 March 2014

अमर शहीद भगत सिंह !

 मैं आज एक फिल्म देख रहा था जो भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु जी एवं अन्य क्रांतिकारियों के जीवन पर आधारित थी  | क्योंकि कल 23 मार्च है इनकी पुण्यतिथि |  हम भारतियो की एक खासियत है जब –जब किसी क्रांतिकारी की जन्म तिथि या पुण्यतिथि होती है तब ही हम उन्हे याद करते है | खेर हम कम से कम उन्हे याद तो करते है मैं तो कुछ बुज़ुर्गों द्वारा अब ये सुनता हूँ की आने वाले कल मे हम शायद ही इन्हे याद करे ! इस आधुनिक भरी दुनिया में  इस फिल्म को  देख एक अलग सा एहसास होने  लगता है | मैंने जाना अगर गांधी जी  चाहते तो भगत सिंह को  बचा सकते थे पर नहीं बचा सके और इतिहास आज भी ये सवाल करता  है की उन्होने इन तीनों क्रांतिकारियों को बचाने मे मदद क्यों नहीं की ?  जो सपना उन्होने देखा था वो पूरा तो हुआ पर अगर वो उस समय ज़िंदा होते तो शायद हम आज़ाद जल्दी हो सकते थे | उनका मकसद था आज़ादी और काँग्रेस भी आज़ादी ही चाहती थी पर दोनों के तरीके अलग थे | काँग्रेस का काम सिर्फ सत्ता हथियाना था चाहे आज़ादी के बाद कौन  किस स्थिति मे है कोई परवाह नहीं और शायद आज भी यही हालत है| भारत को आज़ाद हुए 60 बरस से ऊपर हुए पर उनकी ये बात आज भी सटीक बैठती है |
भगत सिंह जी ने कहा था :-

“आज़ादी हमारा मकसद नहीं है , सिर्फ आज़ादी हमारा मकसद नहीं है , आज़ादी का मतलब क्या है ?  की हुकूमत  अंग्रेज़ों के हाथो से निकल कर मुट्ठी भर रईस ओर ताकतवर हिंदुस्तानियों के हाथो मे चले जाये क्या यहीं आज़ादी है ? इससे आम इंसान की ज़िंदगी मे कोई फर्क आएगा? क्या मज़दूर ओर किसान वर्ग के हालात बदलेंगे ? उन्हे उनका सही हक मिलेगा ? नहीं, आज़ादी सिर्फ पहला कदम है मकसद है वतन बनाना एक ऐसा वतन जहाँ हर तबके के लोगो को बराबरी से जीने का हक मिले , जहाँ मजहब के नाम पर समाज मे बटवारा न हो |
एक ऐसा वतन   जो इंसान का इंसान पर ज़ुल्म बर्दाश्त न करे | मुश्किल है पर असंभव नहीं , हिंदुस्तान जहा इतने सारे धर्म ,जातियाँ, भाषाए ,कल्चर है उसे एक साथ जोड़े रखना आसान नहीं लेकिन हम इस बात को आज नहीं समझेंगे  और इस मसले को लेकर संघर्ष नहीं करेंगे तो हिंदुस्तान कल एक आज़ाद मुल्क तो होगा पर एक भ्रष्ट, शोषक और सांप्रदायिक समाज बनकर रह जाएगा |
हम सबको मिलकर बनाना है एक समाजवादी वतन”  

आप ये पड़कर सोच रहे होंगे की इनमे जो बाते भगत सिंह जी ने काही शत प्रतिशत सही है पर ये सच मैं भी जानता हूँ और आप भी पर हम हाथ पर हाथ धरे बैठे सोचते रह जाते है |

मुझे डर हैं कहीं आगे चलकर आने वाली पीढ़ी से पूछे तो वो अजय देवगन , बॉबी देओल, या सनी देओल याद न रखे उन्हे पता होना चाहिए की असली आज़ादी के हीरो वो थे जो फाँसी के तख्ते पर चड़ गए !

मेरा आपसे बस एक निवेदन है आप कुछ कर सके न सके पर जब जहाँ काही किसी को भी  गलत कार्य करते हुए जैसे भ्रष्टाचार ,  देश से गद्दारी तो ऐसा होने से रोके | अगर आप मिलकर इस देश की मिट्टी से प्यार करते है और जिन क्रांतिकारियों को आदर्श मानते है तो हम 60% युवा देश को विश्व मे तिरंगे की तरह नाम ऊँचा रख सकेंगे |
जय हिन्द ! जय भारत !

- देवेंद्र गोरे

Thursday, 16 January 2014

शिकायत का अधिकार!

हो सकता है कि आपको शीर्षक थोडा अटपटा लगे । शिकायत करने का अधिकार? ये अधिकार तो व्यवस्था ने, हमारे संविधान ने हमें दिया ही हुआ है ना!

कौन होगा इस देश में जिसने आज तक कभी शिकायत न की हो! पुलिस के अत्याचारों और मनमानी के खिलाफ, दफ़तर में रिश्वत की बाट जोह रहे 'बाबू' के फ़ाइल आगे बढ़ाने में आनाकानी के खिलाफ, टूटी सड़कों, घर के बाजू में लगे कूड़े के ढेर और बहती नालियों के खिलाफ, अधिकारियों के बात न सुनने के खिलाफ, ठेकेदारों के सरकार द्वारा तय दरों से ज्यादा वसूलने के खिलाफ; हम सब शिकायत करते ही तो रहते हैं यार! फिर इसमें नया क्या है?

बात तो आप भी सही ही बोल रहे हो । पर मेरे अगले सवाल से आप के मन में चल रहे विचारों की बयार का रुख बदलना चाहिए । हमारी की गयी शिकायतों का कितने प्रतिशत अपने अंजाम तक पहुँचता है? कुछ बुद्धिजीवी वर्त्तमान व्यवस्था में आस्था प्रकट करते हुए रिश्वत का 'शॉर्टकट' अपनाकर अपना काम निकाल ले जाते होंगे, कुछ ऊंची पहुँच का फायदा उठाते हुए 'ऊपर' से फ़ोन करवा देते हैं । और बाकी? सहमत हैं क्या?

यहाँ बात 'छोटे' स्तर पर फैली अव्यवस्था और भृष्टाचार की है । आम आदमी तो सार्वजनिक दफ्तरों के काम-काज के तौर तरीकों और बात बात पर उनकी जेब टटोले जाने से ही सबसे ज्यादा बेहाल है । बड़े भृष्टाचार की बड़ी बड़ी बातें बड़े बड़े लोग जाने, बड़ी बड़ी सरकारें जाने!

दरअसल रिश्वत को आत्मसात कर चुके जमाने ने अगर अपनी आँखें बंद करके दिल पर भारी पत्थर रख लिया है तो इसकी एकमात्र वजह यही जर्जर हो चुकी व्यवस्था है जिसमें एक छोटे बाबू से लेकर लाल नीली बत्तियों में चलने वाले साहब जनाबों तक को सिर्फ 'ऊपर' जवाब देना पड़ता है; नीचे नहीं! और इस 'सांप सीढ़ी' रुपी व्यवस्था में सबसे नीचे वाले खाने में रखा है 'आम आदमी'! उसकी कौन सुनेगा? ऊपर तक पहुंचे कैसे? इतने सांप जो रास्ते में खड़े हैं ।

Wednesday, 16 October 2013

फिल्म समीक्षा :- “वार छोड़ न यार”

3***/5
फिल्म में सोहा अली खान, शरमन जोशी, जावेद जाफरी और मुकूल देव मुख्य भूमिक में हैं। फिल्म में सोहा अली खान एक पत्रकार की भूमिका निभा रहीं हैं। जो भारत-पाक का युद्ध कवर करने जाती है। फिल्म में शरमन जोशी एक भारतीय सिपाही की भूमिका में है, तो वहीं दूसरी तरफ जावेद जाफरी पाकिस्तानी सिपाही हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्ते को लेकर तो कई फिल्में बनी हैं, लेकिन दोनों देश के बीच जंग पर बहुत कम फिल्में ही बनी हैं।  राइटर डायरेक्टर फराज हैदर ह्यूमर का बखूबी इस्तेमाल करते हुए अपना पक्ष रखते हैं कि कैसे चीन और अमेरिका भारत-पाक तनाव को बढ़ावा देकर अपना फायदा करना चाहते हैं। वो दोनों तरफ की सरकारों की अपनी अपनी सेना के प्रति लापरवाही दिखाते हैं। इसमें एक जोक भी है जैसे पाकिस्तानी जवानों का दाल में गोश्त ढूंढना। nuclear bomb की जगह NEWCLEAR bomb जो चीन द्वारा पाकिस्तान को दिया गया | जावेद जाफरी का अभिनय दमदार है उनका फिल्म के हर डाइलॉग में  बहुत गहराई से व्यंग छुपा  है | फिल्म का मजेदार हिस्सा अंताक्षरी जो दो मुल्को के बीच मे खेला जाता है जिसमे एक  दूसरे के देश के गाने गाते है| फिल्म में अफ़ग़ानिस्तान के घुसपेटियों ने भी अपनी छाप छोड़ने मे कसर नहीं छोड़ी |  दिलीप ताहिल चार अलग-अलग किरदारों में फिल्म में कुछ हंसी देते हैं। वो एक भ्रष्ट भारतीय मंत्री हैं, एक पाकिस्तानी नेता हैं, अमेरिकी सीनेटर हैं और चीनी जनरल हैं जिन्हें पहचानना थोड़ा मुश्किल है। संजय मिश्रा पाकिस्तानी कमांडर के तौर पर बेहद अच्छे लगते हैं। ‘वार छोड़ न यार’ एक गंभीर विषय को हल्के-फुल्के तरीके से दिखाने में कामयाब होती है। फिल्म में आर्मी अफसर और रिपोर्टर के बीच का जबर्दस्ती का रोमांटिक ट्रैक भी दिखाया गया है जिसकी जरूरत नहीं है।

मैं इस फिल्म को 4 स्टार दे सकता था अगर हेरोइन सोहा नहीं होती तो पर पर 3 स्टार और एक बार देखना ज़रूर बनाता  है !